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18 सितंबर 2020

न्यायधीश का दंड । The Judgement

अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया। 
जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, "तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट"?
लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया। ;- हाँ'।
जज,:- *'क्यों ?'
लड़का,:- *मुझे ज़रूरत थी।
जज:- *'खरीद लेते।
लड़का:- *'पैसे नहीं थे।'
जज:- *घर वालों से ले लेते।' लड़का:- *'घर में सिर्फ मां है। बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी
जज:- *तुम कुछ काम नहीं करते ?
लड़का:- *करता था एक कार वाश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।'
जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?
लड़का:- सुबह से घर से निकला था, तकरीबन पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और ख़ुसूसन ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं।  'अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ सहित  सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा।'
ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले किया।
*अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।'
*जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी तलब करती है।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।

क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार हैं?

 चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए

😍😍😍.. धन्य हैं ऐसा जज💐💐🙏🙏🙏
धन्य हैं ले लोग जो जजसाहब के निर्णय का स्वागत कर रहे थे...

यह रचना बहुत ही प्यारी है दिल को छू गयी, आप भी पढ़ें। लिखने वाले का हार्दिक आभार
🙏🙏

04 सितंबर 2020

बुरी से बुरी परिस्थिति में भी अपनी उम्मीद बनाये रखनी चाहिये |

  
एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया | उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थी वो जल्द ही खत्म हो गई और पिछले 2 दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिये तरस रहा था |

         वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घंटों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मैत निश्चित है | पर कहीं न कहीं उसे प्रारब्ध पर यकीन था कि मृत्यु होनी हो तो कोई रोक नहीं सकता और जीनी हो तो कोई मार नहीं सकता | और उसे पानी मिल जायेगा | तभी उसे एक झोपड़ी दिखाई दी | उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ | पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था | पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था | आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद थी | वह अपनी बची खुची ताकत से झोपड़ी की तरफ चलने लगा | जैसे जैसे करीब पहुंचता उसकी उम्मीद बढ़ती जाति और इस बार भाग्य भी उसका साथ था | सचमुच वहां एक झोपड़ी थी | पर यह क्या ? झोपड़ी तो विरान पड़ी थी | मानो सालों से कोई वहां भटका न हो | फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोपड़ी के अंदर घुसा | अंदर का नजारा देख उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ |
        वहां एक हैंडपंप लगा था | वह व्यक्ति एक नई ऊर्जा से भर गया | पानी की एक-एक बूंद के लिये तरसता वह तेजी से हैंडपंप को चलाने लगा | लेकिन हैंडपंप तो कब का सूख चुका था | वह व्यक्ति निराश हो गया,उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता | वह निढाल होकर गिर पढ़ा |

         तभी उसे झोपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी | वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोल कर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज दिखा उस पर लिखा था इस पानी का प्रयोग हैंड पंप चलाने के लिये करो और वापिस बोतल भर कर रखना ना भूलना ?
         यह एक अजीब सी स्थिति थी | उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पिये या उसे हैंडपंप में डालकर चालू करे | उसके मन में तमाम सवाल उठने लगे,अगर पानी डालने पर भी पंप नहीं चला | अगर यहां लिखी बात झूठी हुई और क्या पता जमीन के नीचे का पानी सूख चुका हो | लेकिन क्या पता पंप चल ही पड़े, क्या पता यहां लिखी बात सच हो | वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करें ?

       फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पंप में डालने लगा | पानी डालकर उसने गुरु से प्रार्थना की और पंप चलाने लगा |एक, दो, तीन,और हैंडपंप से ठंडा पानी निकलने लगा | वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था | उस व्यक्ति ने जी भर कर पानी पिया, उसकी जान में जान आ गई | दिमाग काम करने लगा | उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया | जब वो ऐसा कर रहा था,तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी | खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था |

         उस व्यक्ति ने रास्ता याद डकर लिया और नक्शे वाली बोतल को वापस वही रख दिया | और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज को उतारकर उस पर उसने लिखा मेरा यकीन कीजिये यह यह हैंडपंप काम करता है |

         यह कहानी संपूर्ण जीवन के बारे में है | यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिये और इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है | जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिये मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया | देखा जाय तो इस कहानी में पानी, जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है, कुछ ऐसी चीजें जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है | किसी के लिये मेरा यह संदेश ज्ञान हो सकता है, तो किसी के लिये प्रेम, तो किसी और के लिये पैसा | यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिये पहले हमें अपने तरफ से उसे कर्म रूपी हैंडपंप में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पीते हैं |

भारत के देवव्रत ने अपनी NI (Natural Intelligence) से दुनिया को चौंका दिया है।

ये है भारत के gen-z की ताकत.. 🔥 दुनिया एक तरफ जहाँ AI (Artificial Intelligence) से हैरान है, वहीं भारत के देवव्रत ने अपनी NI (Natural Intel...